Thursday, September 18, 2008

प्रेम पर चोट

"जमाना बदला, पर नही बदला प्रेम से लिया जाने वाला बदला" नॉएडा जनपद मे गुरुवार को प्रेमी जोड़े को मारकर जला दिया समाज के लिए बहुत शर्म नाक बात है । हम लोग तो नई पीड़ी के लोग है । मुझे तो लगता है ना जाने कितने विकास कर लिए लेकिन प्रेम से बदला लेने मे हैवानियत को भी मात कर देते है । वैसे बदला लेने मे एक बात समान है,यहाँ पर लड़का -लड़की मे फर्क नही करते है मरना दोनों को होता है । मैं तो अपने आस-पास घटित घटनाओं के अनुभव के बाद यह कह सकता हूँ की प्यार एक प्यारा सा एहसाश है ।
आप हर उस इंसान से प्यार कर सकते है, जो आपको प्यारा लगता हो । या तो यह भी कह सकते है की प्यार एक विश्वास है उसके के प्रति जिसे आप मन या दिल से पसंद करते हो । इन दोनों का दोष सिर्फ़ इतना ही तो था की वो प्यार करते थे उहने क्या मिला ।मुझे लगता है जब मारने वाले एक हो सकते है तो नई पीड़ी क्यों नही एक हो सकती ? क्या नई पीड़ी ऐसे ही मरती रहेगी। जब कोई चीज छीन रहा तो अपने को भी बचाते सामने वाले को परेसान कर देना होगा । क्या नई पीड़ी बे मतलब की परम्परा में जलती रहेगी ।
काश ऐसा हो की सबको अपनी पसंद का ,प्यार करने वाला जीवन साथी मिले जो आप मर मिटे ।
( किसी रोज सिर्फ़ प्यार पर बात होगी जिसमे हर पहलू बात होगी जहाँ नये लोगो के साथ हमारे अपने बड़ों का साथ भी होगा । )

Wednesday, September 10, 2008

क्यों ना कुछ अपने बारे मैं

आज मेरे एक साथी ने मुझसे कहा बहुत लिखते हो दूसरो के बारे में कभी अपने बारे में भी लिखो तो जाने बड़े बनते हो ईमानदार। बस मैंने ठान लिया अब तो लिखना है अपने बारे में , वैसे अपने बारे में सही -सही लिखना मुश्किल है , प्रयास करने में कोई हर्ज नही । विस्मिल्ला करता हूँ ।
जब मैं लिखना बैठा तो मुझे अपनी ज़िन्दगी के बिताये हर वो पल याद आ गए जो रोकर या हंसकर गुजारे। नानी की हथेलियों का खुरखुरापन भी याद आया जब वो लाड़ से चहेरे पर फेरती थी , अब वो नही रही । ऐसा ही कुछ मेंरे बाबा की बातें है जो बस यादें ही रह गई है । कहते है न की परिवर्तन का नाम ही जीवन है ।
बाकी मेरे घर में वो सब कुछ है जिससे हम लोग खुश रह लेते है ।
सबसे पहले मैं यह बताना चाहता हूँ की मैं ख़ुद को कैसे देखता हूँ और मैं कौन हूँ । जब भीषण गर्मी के बाद तपती धरती और तपते आसमान में काली घटाए हवायों के साथ उमड़ती चली आती है । मैं उन उमड़ती काली घटायों की बारिश की वह पहली बूँद हूँ जो कहती है की अब मुझसेअब नही रहा जाता कुछ कर गुजरने की छटपटाहट है चाहें मंजिल पाऊ या फ़िर रास्ते की गर्मी से बीच में ही सूख जाऊं ----।
वैसे तो जीवन में ऐसा कुछ भी नही किया है जो लिखा या बताये जाने को हो अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है । जिसमे अपने बडों के आशिर्बाद के साथ -साथ साथियों के साथ भी तो जरुरी होगा ।
चाँद चाहे कितनी भी कोशिश कर क्यों न कर ले ,वह रात को दिन नही बना सकता । ऐसा ही कुछ तो होता है साथियों के बिना कोई कार्य करना। मेरा तो किसी काम को करने के लिए पहले कदम को आगे करने में विश्वास है , क्योंकि कदम आगे करने पर रास्ता ख़ुद बा ख़ुद निकल आता है । ऐसा मेरा मानना है । मेरे अब तक के जीवन की दो इच्छाए रही है। पहली ,बेह्तर इंसान बनना । दूसरी ,पूरी तरह खुश रह कर अपने आस पास के लोगो को खुश रखना । प्रभु के आशिर्बाद से कुछ हद तक मैं अपने को सफल भी मानता हूँ ।
मैं अत्यन्त सादा और साधारण इंसान हूँ जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा से कार्य कर रहा हूँ ।
रही बात चेहरे -मोहरे की वो कोई ख़ास नही है । प्रभु ने जान - बूझ कर अच्छा चेहरा मोहरा नही दिया । वैसे मैं कभी -कभी अपने प्रभु से कह लेता हूँ की अरे प्रभु थोड़ा सा अच्छा चेहरा -मोहरा दे दिया होता तो क्या चला जाता ,कुछ हम भी इतरा लेते । हमारा भी तो मन है की कोई हमे अपनेपन का एहसास कराए , हमारी भी तारीफ करे । क्या सारे अपनेपन का ठेका अच्छे चेहरे - मोहरे वालो का है । खैर जाने दीजिये अब इन बातो मैं क्या रखा है ,जो हो गया उसे बदला तो नही जा सकता है । कुल मिला कर मैं बहुत खुश हूँ ,रचनात्मकता मैं विश्वास रखता हूँ क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है अगर हम लोग हर पल अपने चारो ओर नही देखेगे तो कुछ ना कुछ नज़ारा छुट जाएगा । ईश्वर हर पल मेरे साथ है ऐसा मेरा विश्वास है । ईश्वर ने मेरे हर ख्वाब को हकीकत में बदला , लेखन भी उनमे से एक है । ईश्वर का आशिर्बाद ही तो है की मुझ जैसे नालायक को अलौकिक चमत्कार का एहसास कराया । बाकि ईश्वर पर छोड़ दिया है की वो कब तक अलौकिक चमत्कार का एहसास बनाये रखता है बाकि उसकी मर्जी । मैंने अपनी बातचीत में बारिश , गर्मी का जिक्र किया जब बात पूरी कर रहा हूँ तो बरसात का मौसम हो गया है तो उसका असर लेखन पर आ गया है उसके लिए माफ़ कर दे क्योंकि जवान लेखनी से गलती हो जाया करती है । अपने बारे मैं लिखना वाकई मैं काफ़ी मुश्किल है मुझे आज पता चल गया की लोग क्यों अपने बारे में लिखने से बचते है वैसे मैं भी कम नही हूँ मैंने भी कुछ अपनी बातें छुपा ली है अभी मुझे घर मैं रहना है, इतना तो मुझे बेईमान रहना का अधिकार है ।
बस सिर्फ़ अपने अलौकिक चमत्कार के लिए ...............
'फ़िर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए ,
फ़िर पत्तो की पायजेब बजी तुम याद आए । { जनाब नासिर काजिम }

Monday, September 08, 2008

बहने

"बहने चिड़िया धूप की , दूर गगन से आयें ,
हर आँगन मेहमान सी , पकडो तो उड़ जाए।" [निदा फाजली ]

"आँगन -आँगन बेटियाँ छांटी -बांटी जाए
जैसे बाले गेहूं की ,पके तो काटी जाए "। (अज्ञात )

Tuesday, August 26, 2008

छोटी बहन

अपनी छोटी बहन के लिए ............
छोटी बहन ,सबसे प्यारी होती है ,
यादो में सबसे मीठी,
कविताओं मे भी सबसे अच्छी ।
बातो मे सबसे निराली ,भावनाओ में कोमल ,
सपनों से नाजुक होती है छोटी बहन ,
दिल -दिमाग ,सासं इन सबसे से
अलग चेहरा लेकर रहती है
छोटी बहन ।

Sunday, August 24, 2008

अपने दोस्त राहुल को........

"कैसे लिख दूँ की लग जायें मेरी उमर भी तुझको ,हम ख़ुद इस उमर के सहारे नही ,हो तो तेरी उमर उतनी जितने की आसमान में तारे "
माँ के सुकुमार और बहन के दुलारे राहुल को जन्मदिन की बहुत -बहुत बधाई । ऊपर वाला तुम्हारे सपने साकार करे।
" आने वाले दिन
मौसमो के दिन हो ,
मुस्कराने के दिन हो ,
जूझने के दिन के बाद ,
जीतने के दिन हो,
हमारे दिन हो ।"

Saturday, August 23, 2008

सुन्दरता


"लड़के का केवल लड़का होना ही काफी होता है । पर कन्या के जन्म में प्रकट करने के लिए उसकी सुन्दरता का विश्लेषण उसके साथ लगाना आवशक हो जाता है।

Thursday, August 21, 2008

दिल की दो लाइन

"पत्थर पे सिर रख कर सो जाने को जी चाहता है ,इतना रुलाया है अपनों ने , अपने पे हंसने को जी चाहता है। "(अज्ञात )