Monday, March 23, 2009
वो रेत का घरोंदा
Sunday, March 22, 2009
" माँ ऐसी होती है "
Monday, March 02, 2009
चुहलबाजी -जनहित मे जारी
- यदि आप पत्नी से झूठ नही बोल सकते तो आप पति होने लायक नही है ।
- पत्नी रो रही हो तो सहानभूति का प्रदर्शन कीजिये ,मुस्करा रही हो तो सतर्क हो जाए ।
- बरातों मे विवाहित पुरष की पहचान --जो अच्छा व तेजी से नाच रहा हो ।
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Saturday, February 07, 2009
I LOVE YOU का अंकगणित
सच्चा प्रेम मुखर नही होता ,मौन रहता है । सामने वाले को बिना बोले ही विश्वासऔर प्रेम का अहसास हो जाए तभी अपनेपन का मजा है । दोनों तरफ आग बराबर है, लेकिन इजहार नही हो पा रहा है समझ दोनों रहे है । तबही तो कबीरदास जी ने कहा है कि "मन मस्त हुआ तब क्या बोले "। नेह ,मुस्कराहट ,महत्व .मोह , माही,और मौन तो प्रेम को सबल बनाते है । इसलिए प्रेम कीजिये और प्रेम का आँगन आबाद बनाये रखिये । बस तेज भागती दुनिया ने आई लव यू जैसे जुमले की जगह 'अंकगणित' के 143 में बदल दिया है । इधर से 143तो उधर से भी 143बस हो गया प्यार । प्यार अंकगणित का पाठ नही है । क्योंकि 143के फेर में लोग देह का भूगोल पढ़ रहे है । तभी तो किसी ने कहा है की 'तन के तट पर मिले हम कई बार , द्वार मन का अब तक khula नही ,सैर करके चमन की क्या मिल हमे ,रंग कलियों का अब तक घुला नही । लोगो को देह के भूगोल की बजाये प्यार को अहसास में महसूस करना होगा ।
Thursday, January 15, 2009
पुनः स्वास्थ्य सेवाओ की बदहाली पर चिंता
प्रो .भार्गव की चिंता वाजिब है। प्रदेश की स्थितियां बहुत ख़राब चुकी है । स्वास्थ्य सेवाए ऐसी ही रही तो बीमार पीढी हमको रिपलेश करेगी उसके हम लोग ही जिम्मेदार होंगे । तब हमारी बूढे शरीर में इतना दम नही होगा की उनकी बीमारी को बर्दाश्त कर सकेगे ।
Wednesday, January 07, 2009
उत्तर प्रदेश को बीमार प्रदेश का दर्जा........ शासन को बधाई
अब सरकार कल कुछ अधिकारीयों पर गाज गिरा कर इतिश्री कर लेगी । हमारा शासन पूर्व की भति काम करता रहेगा । आज किसी अधिकारी पर गाज, कल किसी पर ऐसे ही चलता रहेगा ।
Thursday, January 01, 2009
प्रार्थना
ऐ"हे ईश्वर , यदि मैं विजय का पात्र हूँ तो मुझे विजेता होने की शक्ति प्रदान करे ,लेकिन यदि मैं हारूं तो मुझे कापुरष नही अपितु एक बहादुर की तरह हार को ,स्वीकार करने की शक्ति दे ,यही मेरी प्रार्थना है । मुझे विजेताओं के गुजरने वाली राह पर उनके अभिनंदन के लिए खड़ी भीड़ में सम्मिलित होने और यह कहने की शक्ति दे की 'यह वे लोग है जो मुझसे बेहतर थे । "
"जिंदगी मे कभी रिश्तों को बनाये रखने की कोशिश मत कीजिये ,बस रिश्तों में जिंदगी बनाये रखिये"
(Rajshri Misra का एस एम एस से आया संदेश )
Wednesday, December 24, 2008
जो धागा तुम से जुड़ गया..........
यह पोस्ट मैं उनके दर्द व अनुभव के आधार पर ही लिख पा रहा हूँ इस नाते यह पोस्ट उन्ही बुजुर्गो लोगो के लिए जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा।
रह्स्वादी कहते है की जीवन एक अजूब पहेली है ,इसे जाना नही जा सकता । हम जीवन के पूरे सफ़र में एक ऐसे यात्री की भूमिका निभाते है ,जो आशा की नन्ही किरण की खोज में भटकता रहता है । कितना अच्छा हो की इस लंबे सफर में कोई मन का मीत मिल जाए । जब हमारे पैर लड़खडाने लगे तो वह हाथ थाम ले और जब हम सफलता के शिखर पर हो तो वो भी सहभागी हो और सत्य के अन्तिम पलों में साथ हो । वह मन का मीत हमारा जीवन साथी ही हो सकता है ।
परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई होने के साथ -साथ स्नेह का स्रोत भी है । मधुर पारिवारिक माहौल से सिर्फ़ व्यक्ति को पनपने का मौका मिलता है बल्कि वह समाज को भी संतुलित करता है ।
परिवार को बसाने और बनाये रखने में सबसे अहम् भूमिका पति -पत्नी की ही तो होती है , चाहे वे नवविवाहित हो या बरसो पुराने । क्यों न वह मेड फार इच अदर वाले भी हो । सम्बन्धों का स्वरूप बदलते मौसम की तरह है ,जिसमे कभी गर्माहट , कभी ठंडक ,तो कभी बसंत का जादू मुस्करा उठता है, उसमे धूप -छावं की आखं मिचौनी सदा अपने खेल खेलती रहती है । लेकिन एक बात और भी है प्रेम रस में भीगे रहना ही विवाह नही है हालाँकि दाम्पत्य की स्निग्धा उसके बिना कभी सम्पूर्ण नही हो सकती है । कोई भी रिश्ता हो उसमे ईमानदरी का बीज भी होना जरुरी है तभी तो रिश्ता निभाने का मजा है । किसी भी रिश्ते में अपनेपन के साथ निश्ल भावः हो तो कहने ही क्या । इन सबके होने से संबंधो की बगिया सदाबहार रह सकती है ।
हमें जरूरत सबेरे की ज्यादा है ,उसमे आलोकित होकर ही हम सुख के ग्राही हो सकते है वैसे पी.वी. शैली के शब्दों में कहा जाए तो "दिन बसंत के दूर नही अब , आता हो तो आए पतझड़ ।
Friday, December 19, 2008
जाते बरस के नाम
जाते बरस का संदेश -: कम खर्च करो ,कम उधार लो और अपनी देनदारी से मुक्ति पाओ । प्रेम और ताजी हवा हर साल मिलेगी , उसका भरपूर आन्नद उठाने से मत चूको। जीवन में रोमानियत भी लाओ और खूब बोलो और खूब हँसों।
"सोते रहना ही कलयुग है , जगना द्वापर है , उठकर खड़ा होना त्रेता है और चलना ही सतयुग है । "
Friday, December 05, 2008
कोई मेरा बचपन वापस ला दे ?
बड़ा होने से डरता है । "
कोई मेरा बचपन वापस ला दे । मुझे अब कुछ नही लेना है बस कोई मेरा बचपन ला दे ,क्योकि बचपन ही तो राज -सिंहहासन था जिसे हमने पीछे छोड़ दिया । अब बड़ों की दुनिया में मन नही लगता ,अब लगता है की बचपन ही तो राज सिंहहासन था ।
कागज़ की कश्ती थी ,
पानी का किनारा था ,
खेलने की मस्ती थी ,
दिल ये आवारा था ,
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में,
वो नादाँ बचपन कितना प्यारा था ......
Thursday, December 04, 2008
मुंबई पर हमला यानि देश पर हमला
आतंकवादी सफल हो रहे है और खुफिया तंत्र असफल हो रहा है चिंता का विषय है ।
आक्रोश के साथ ,बस इतना ही ।
Saturday, October 11, 2008
बिन फेरे हम तेरे
कानून बन जाने से बिना फेरे लिए साथ रहने वाले जोडों को शादी -शुदा दम्पंती के बराबर दर्जा मिल जाएगा और ऐसी महिलायें साथ रहने वाले आदमी की सम्पंती व गुजारा भत्ता की भी हक़दार
होगी ।मलिमथ कमेटी की सिफारिश पर आधारित इस प्रस्ताव में सी आर पी सी की धारा १२५ में उल्लेखित 'पत्नी' शब्द की परिभाषा को संशोधित करने की बात कही गयी है । वैसे भारतीय समाज में शादी की पवित्रता और जरूरत को देखते हुए ऐसे दोहरे रिश्तो से सामाजिक विसंगतिया होने की संभावना हो जायेगी । जब देश में कानूनी रूप से बहु -विवाह पर रोक है । तब दूसरी महिला को 'पत्नी 'का दर्जा कानून की अवहेलना मानी जायेगी ।
यदि पत्नी ही कहलाना है और बिना शादी के साथ रहने वाले महिला और पुरूष दोनों आविवाहित है तब महिला को औपचरिक शादी से पत्नी का दर्जा देने कोई एतराज क्यों ?यदि' लिव -इन -रिलेशनशिप' उन जोडों के बीच है जिनमे पुरूष विवाहहित है तो सामाजिक तरीके से विवाह करने वाली और उसके बच्चों के अधिकारों का क्या होगा वाजिब ही होगा की ऐसे संबंधो को कानूनी मोहर लगने पर पहली पत्नी और उसके बच्चों को मानसिक और आर्थिक आघात लगेगा और 'पत्नी 'जैसी दूसरी महिला को अधिकार और सुरक्षा देने के नाम पर पत्नी को आसुरक्षित माहौल में धकेल दिया जाएगा ।
यह कैसा न्याय है ?
सबसे जरुरी बात यह है की 'लिव -इन -रिलेशनशिप 'को कानून के दायरे में लाने पर विवाह जैसी संस्था की अन्तिम अनिवार्यिता पर प्रश्न चिह्न नही लग जाएगा । कुल मिला कर मेरा मानना है की किसी भी रिश्ते की चाभी परस्पर विश्वास और वचन पर है । जो हमारे बीच होती है और होनी भी चाहिए ।
उसी विश्वास को जीवन पथ पर निभाने वाले साथियों के लिय :-"गुलाब ऐसे ही थोडें गुलाब होता है ,यह बात काटों पे चलने पर समझ मैं आती है । "
Thursday, September 18, 2008
प्रेम पर चोट
आप हर उस इंसान से प्यार कर सकते है, जो आपको प्यारा लगता हो । या तो यह भी कह सकते है की प्यार एक विश्वास है उसके के प्रति जिसे आप मन या दिल से पसंद करते हो । इन दोनों का दोष सिर्फ़ इतना ही तो था की वो प्यार करते थे उहने क्या मिला ।मुझे लगता है जब मारने वाले एक हो सकते है तो नई पीड़ी क्यों नही एक हो सकती ? क्या नई पीड़ी ऐसे ही मरती रहेगी। जब कोई चीज छीन रहा तो अपने को भी बचाते सामने वाले को परेसान कर देना होगा । क्या नई पीड़ी बे मतलब की परम्परा में जलती रहेगी ।
काश ऐसा हो की सबको अपनी पसंद का ,प्यार करने वाला जीवन साथी मिले जो आप मर मिटे ।
( किसी रोज सिर्फ़ प्यार पर बात होगी जिसमे हर पहलू बात होगी जहाँ नये लोगो के साथ हमारे अपने बड़ों का साथ भी होगा । )
Wednesday, September 10, 2008
क्यों ना कुछ अपने बारे मैं
जब मैं लिखना बैठा तो मुझे अपनी ज़िन्दगी के बिताये हर वो पल याद आ गए जो रोकर या हंसकर गुजारे। नानी की हथेलियों का खुरखुरापन भी याद आया जब वो लाड़ से चहेरे पर फेरती थी , अब वो नही रही । ऐसा ही कुछ मेंरे बाबा की बातें है जो बस यादें ही रह गई है । कहते है न की परिवर्तन का नाम ही जीवन है ।
बाकी मेरे घर में वो सब कुछ है जिससे हम लोग खुश रह लेते है ।
सबसे पहले मैं यह बताना चाहता हूँ की मैं ख़ुद को कैसे देखता हूँ और मैं कौन हूँ । जब भीषण गर्मी के बाद तपती धरती और तपते आसमान में काली घटाए हवायों के साथ उमड़ती चली आती है । मैं उन उमड़ती काली घटायों की बारिश की वह पहली बूँद हूँ जो कहती है की अब मुझसेअब नही रहा जाता कुछ कर गुजरने की छटपटाहट है चाहें मंजिल पाऊ या फ़िर रास्ते की गर्मी से बीच में ही सूख जाऊं ----।
वैसे तो जीवन में ऐसा कुछ भी नही किया है जो लिखा या बताये जाने को हो अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है । जिसमे अपने बडों के आशिर्बाद के साथ -साथ साथियों के साथ भी तो जरुरी होगा ।
चाँद चाहे कितनी भी कोशिश कर क्यों न कर ले ,वह रात को दिन नही बना सकता । ऐसा ही कुछ तो होता है साथियों के बिना कोई कार्य करना। मेरा तो किसी काम को करने के लिए पहले कदम को आगे करने में विश्वास है , क्योंकि कदम आगे करने पर रास्ता ख़ुद बा ख़ुद निकल आता है । ऐसा मेरा मानना है । मेरे अब तक के जीवन की दो इच्छाए रही है। पहली ,बेह्तर इंसान बनना । दूसरी ,पूरी तरह खुश रह कर अपने आस पास के लोगो को खुश रखना । प्रभु के आशिर्बाद से कुछ हद तक मैं अपने को सफल भी मानता हूँ ।
मैं अत्यन्त सादा और साधारण इंसान हूँ जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरणा से कार्य कर रहा हूँ ।
रही बात चेहरे -मोहरे की वो कोई ख़ास नही है । प्रभु ने जान - बूझ कर अच्छा चेहरा मोहरा नही दिया । वैसे मैं कभी -कभी अपने प्रभु से कह लेता हूँ की अरे प्रभु थोड़ा सा अच्छा चेहरा -मोहरा दे दिया होता तो क्या चला जाता ,कुछ हम भी इतरा लेते । हमारा भी तो मन है की कोई हमे अपनेपन का एहसास कराए , हमारी भी तारीफ करे । क्या सारे अपनेपन का ठेका अच्छे चेहरे - मोहरे वालो का है । खैर जाने दीजिये अब इन बातो मैं क्या रखा है ,जो हो गया उसे बदला तो नही जा सकता है । कुल मिला कर मैं बहुत खुश हूँ ,रचनात्मकता मैं विश्वास रखता हूँ क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है अगर हम लोग हर पल अपने चारो ओर नही देखेगे तो कुछ ना कुछ नज़ारा छुट जाएगा । ईश्वर हर पल मेरे साथ है ऐसा मेरा विश्वास है । ईश्वर ने मेरे हर ख्वाब को हकीकत में बदला , लेखन भी उनमे से एक है । ईश्वर का आशिर्बाद ही तो है की मुझ जैसे नालायक को अलौकिक चमत्कार का एहसास कराया । बाकि ईश्वर पर छोड़ दिया है की वो कब तक अलौकिक चमत्कार का एहसास बनाये रखता है बाकि उसकी मर्जी । मैंने अपनी बातचीत में बारिश , गर्मी का जिक्र किया जब बात पूरी कर रहा हूँ तो बरसात का मौसम हो गया है तो उसका असर लेखन पर आ गया है उसके लिए माफ़ कर दे क्योंकि जवान लेखनी से गलती हो जाया करती है । अपने बारे मैं लिखना वाकई मैं काफ़ी मुश्किल है मुझे आज पता चल गया की लोग क्यों अपने बारे में लिखने से बचते है वैसे मैं भी कम नही हूँ मैंने भी कुछ अपनी बातें छुपा ली है अभी मुझे घर मैं रहना है, इतना तो मुझे बेईमान रहना का अधिकार है ।
बस सिर्फ़ अपने अलौकिक चमत्कार के लिए ...............
'फ़िर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए ,
फ़िर पत्तो की पायजेब बजी तुम याद आए । { जनाब नासिर काजिम }
Monday, September 08, 2008
बहने
हर आँगन मेहमान सी , पकडो तो उड़ जाए।" [निदा फाजली ]
"आँगन -आँगन बेटियाँ छांटी -बांटी जाए
जैसे बाले गेहूं की ,पके तो काटी जाए "। (अज्ञात )
Tuesday, August 26, 2008
छोटी बहन
यादो में सबसे मीठी,
कविताओं मे भी सबसे अच्छी ।
बातो मे सबसे निराली ,भावनाओ में कोमल ,
सपनों से नाजुक होती है छोटी बहन ,
दिल -दिमाग ,सासं इन सबसे से
अलग चेहरा लेकर रहती है
छोटी बहन ।
Sunday, August 24, 2008
अपने दोस्त राहुल को........
माँ के सुकुमार और बहन के दुलारे राहुल को जन्मदिन की बहुत -बहुत बधाई । ऊपर वाला तुम्हारे सपने साकार करे।" आने वाले दिन
मौसमो के दिन हो ,
मुस्कराने के दिन हो ,
जूझने के दिन के बाद ,
जीतने के दिन हो,
हमारे दिन हो ।"