Monday, August 17, 2009

यादें......

दूर कहीं उस पार क्षितिज के , रहती मन की यादें
ले आती आँचल में अपने ,बीती यादों के लम्हे ,
लेकर खुशिओं का खजाना ,यूं आंखों में उतर आती है यादें ।
जैसे सूरज की किरणों से खिलती सागर की लहरें ,
ले जाती है इस भावुक मन को ,नील गगन में ऐसे ,
हसीं तमन्नाओ के सौदागर हो जैसी......... ।
चहुँ ओर खिले है पुष्प अनोखे ,
नई आस है मन में ............. ।
दूर कहीं उस पार ..... क्षितिज के..... ।
.......................
कभी -कभी कुछ शब्द यूही मन में आ जाते है और हम लोग इसको कागज पर उकेर देते है मेरे यह शब्द भी उसका ही हिस्सा है ।
ma

5 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आज़ादी की 62वीं सालगिरह की हार्दिक शुभकामनाएं। इस सुअवसर पर मेरे ब्लोग की प्रथम वर्षगांठ है। आप लोगों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष मिले सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए मैं आपकी आभारी हूं। प्रथम वर्षगांठ पर मेरे ब्लोग पर पधार मुझे कृतार्थ करें। शुभ कामनाओं के साथ-
रचना गौड़ ‘भारती

Babli said...
This comment has been removed by the author.
Babli said...

बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने! पढकर बहुत अच्छा लगा!
मेरे नए ब्लॉग पर आपका स्वागत है!
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com

योगेन्द्र मौदगिल said...

सुंदर रचना... वाह..

ज्योति सिंह said...

man ki baate hi sundar hoti hai or man ko chhuti bhi hai ,jai hind .